Monday, 25 May 2020

भारतीय इतिहास के कुछ विषय : वर्ग 12 पाठ तीन – बन्धुत्व , जाति तथा वर्ग(भाग-7)

महाभारत काल में सम्पति पर स्त्री और पुरूष के भिन्न अधिकार

* ऋग्वैदिक काल में परिवार की सम्पति पर पिता का एकाधिकार होता था |
* मनुस्मृति  के अनुसार पैतृक जायदाद  का माता -पिता की मृत्यु के बाद सभी पुत्रों में समान रूप से बंटबारा किया जाना चाहिए  किन्तु ज्येष्ठ पुत्र विशेष भाग का अधिकारी होता था |  स्त्रियों का पैतृक सम्पति में कोई अधिकार नहीं होता |
सिर्फ विवाह के समय मिले उपहार पर स्त्री का अधिकार था किन्तु उसका  उपयोग पति के आज्ञा से ही कर सकती थी |
विज्ञानेश्वर की मिताक्षरा में लिखा है कि पुत्र को यह अधिकार था की वह पिता से सम्पति का विभाजन करा ले |
* जीमूतवाहन  ने दयाभाग में लिखा है की पिता की मृत्यु के पश्चात ही पुत्र को सम्पति में अधिकार मिलना चाहिए |
* जैसा की आप जानते है की महाभारत में युधिष्ठिर अपने प्रतिद्वन्द्वी  दुर्योधन के साथ खेले गए द्यूत क्रीडा में स्वर्ण , हस्ति , रथ, दास , सेना , कोष , राज्य , तथा अपनी प्रजा की सम्पति , अनुजों और फिर स्वयं  को भी दांव पर लगाकर हार जाते | 
* इसके उपरांत पांडवों की  सहपत्नी  द्रोपदी  को भी दांव पर लगाया और उसे भी हार गए |

द्रोपदी के प्रश्न :  विचार योग्य 
 ऐसा माना जाता है कि द्रोपदी ने युधिष्ठिरसे यह प्रश्न किया था की वह उसे दांव पर लगाने से पहले स्वयं को हार बैठे थे या नहीं |  इस प्रश्न  के उत्तर में दो भिन्न मतों को प्रस्तुत किया गया |
1. तो यह कि यदि युधिष्ठिर ने स्वयं को हार जाने के पश्चात द्रोपदी को दांव पर लगाया तो यह अनुचित नही  क्योंकि पत्नी पर पति का नियन्त्रण सदैव रहता है |
2. यह कि एक दासत्व स्वीकार करने वाला पुरूष  ( जैसे उस क्षण युधिष्ठर थे ) किसी और को दांव पर नही लगा सकता |

 इन मुद्दों का कोई निष्कर्ष नही निकला और अंतत: धृतराष्ट्र ने सभी पांडवों और द्रौपदी को उनकी निजी  स्वतंत्रता पुन: लौटा दी |
* गुप्त काल के दौरान  यह देखने को मिलता है की उच्च वर्ग में सम्पति पर स्त्रियों का अधिकार होता था | जैसे वाकाटक नरेश की मृत्यु  उपरांत महिषी प्रभावती गुप्त  का राज्य पर शासन था |

मनुस्मृति के अनुसार सम्पति का अर्जन :-
* पुरुषों के लिए  सात तरीके :  विरासत , खोज , खरीद , विजित करके , निवेश , कार्य द्वारा  तथा सज्जनों द्वारा दी गई भेंट को स्वीकार करके |
* स्त्रियों के लिए  छः तरीके :  वैवाहिक अग्नि के सामने मिले भेंट . वधूगमन के समय मिली भेंट , स्नेह के द्वारा प्रतीक के रूप में , भ्राता , माता और पिता द्वारा दिया गया उपहार , परवर्ती काल में मिली भेंट  , अनुरागी पति से प्राप्त उपहार या धन |
भातीय इतिहास के कुछ विषय : बन्धुत्व , जाति और वर्ग 
भारतीय इतिहास के कुछ विषय : बंधुत्व,जाति और वर्ग 
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