Sunday, 28 November 2021

पेटीएम या गूगल पे वाला मोबाइल चोरी हो जाए तो तुरंत करें ये काम, वरना खाली हो जाएगा आपका बैंक अकाउंट

 

काम की बात: पेटीएम या गूगल पे वाला मोबाइल चोरी हो जाए तो तुरंत करें ये काम, वरना खाली हो जाएगा आपका बैंक अकाउंट 

अगर फोन हो गया है चोरी तो अपने Paytm और गूगल पे अकाउंट को ऐसे करें डिलीट




अगर आपका फोन खो गया है और आपको ये चिंता सता रही है कि कहीं गूगल पे और पेटीएम से पैसे चोरी ना हो जाएं तो ये स्टेप्स फॉलो करें। 

आजकल हमारा आधा काम फोन से होता है और यकीनन अगर आपसे कहा जाए कि फोन ने अब हमारे पर्स, डायरी, रेडियो, कैलेंडर, अलार्म क्लॉक, लेटर्स आदि की जगह ले ली है तो गलत नहीं होगा। फोन में ही हमारा सारा डाटा रखा होता है और साथ ही साथ यूपीआई और पेमेंट एप्स भी होते हैं जिनकी जरूरत अब हर घड़ी होने लगी है। फोन के ये एप्स हमें बहुत ज्यादा सुविधा देते हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ये खतरनाक नहीं होते।

कई बार फोने चोरी हो जाने या फिर किसी को दे देने के कारण हमें ये महसूस होता है कि हमारे पेटीएम और गूगल पे अकाउंट्स को खतरा हो सकता है। इन अकाउंट्स के कारण हम पैसे की सहूलियत भी देख सकते हैं और इनकी वजह से हमारे पैसे का नुकसान भी हो सकता है।

ऐसे में अगर आपका फोन खो जाता है तो किस तरह से अपने पेटीएम या गूगल पे अकाउंट्स को डिलीट किया जाए ये हम आपको बताते हैं।

पेटीएम अकाउंट को कैसे करें डिलीट?




अधिकतर लोगों का काम पेटीएम अकाउंट की वजह से चलता है और अब यूपीआई और KYC के बाद सभी मुख्य अकाउंट्स भी इससे जुड़ गए हैं। तो क्या करें?

सबसे पहले आप पेटीएम को किसी और डिवाइस में इंस्टॉल करें।
अब दूसरे डिवाइस में अपना यूजरनेम, पासवर्ड और नंबर डालें (ये वही होना चाहिए जो आपके खोए हुए फोन में मौजूद था, आपको आपका यूजरनेम और पासवर्ड याद रखना होगा।)
अब ऊपर हैमबर्गर मेन्यू पर जाएं। (सेटिंग्स पर)
प्रोफाइल सेटिंग में जाकर आप “Security and Privacy” (सिक्योरिटी और प्राइवेसी) सेक्शन में जाएं।
अब यहां जाकर “Manage Accounts on All Devices” (सभी डिवाइस में अकाउंट को मैनेज करें) ऑप्शन पर जाएं।
यहां जाकर आपको सभी अकाउंट्स से लॉग आउट करना है।
सिस्टम आपसे पूछेगा कि क्या आप ऐसा करने के लिए श्योर हैं तो आपको Yes ऑप्शन सेलेक्ट करना है।(फेसबुक पर आपको कौन देख रहा है?)
पेटीएम का हेल्पलाइन नंबर-
“01204456456” नंबर पेटीएम का हेल्पलाइन नंबर है। अगर आपको ऊपर दिए हुए स्टेप्स करने में कुछ समस्या हो रही है तो आप इसपर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा, आप पेटीएम की वेबसाइट पर जाकर “Report a Fraud” ऑप्शन पर क्लिक कर सकते हैं।

आप अपने दूसरे स्मार्टफोन की मदद से पेटीएम की पूरी हिस्ट्री और डेटा डिलीट कर सकते हैं। ये ऑप्शन पेटीएम द्वारा दिया जाता है। अगर आप चाहें तो इसके लिए हेल्पलाइन या फिर वेबसाइट की मदद ले सकते हैं।

गूगल पे अकाउंट को डिलीट करना-




गूगल पे अकाउंट को डिलीट करने के लिए सबसे अच्छा तरीका साबित हो सकता है कि आप अपना डेटा रिमोटली डिलीट कर दें। गूगल आपको ऑप्शन देता है कि आप किसी अन्य डिवाइस से अपने डिवाइस का डाटा डिलीट कर लें। ये फीचर तब बहुत अच्छा साबित हो सकता है जब आपका फोन खो जाए या फिर आपको अपने डेटा की चिंता हो।

आप किसी अन्य फोन पर अपने गूगल अकाउंट को लॉग इन करें और “android.com/find” ऑप्शन पर जाएं।
यहां से आप अपना डिवाइस ढूंढ सकते हैं, लॉक कर सकते हैं या उसका डाटा इरेज कर सकते हैं।
इसके अलावा आप 18004190157 डायल कर गूगल पे कस्टमर केयर से भी मदद ले सकते हैं।
इस प्रोसेस में आपको अपना अकाउंट वेरीफाई करना होगा।
ये सारे स्टेप्स काफी आसान हैं और अगर आपके साथ फोन खो जाने जैसी समस्या हुई है तो इन्हें जरूर ट्राई करें। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें ।

Thursday, 25 November 2021

Class 6 Ncert Notes - Geography for UPSC & Other Exam

Class 6 Ncert Notes- Geography for UPSC & Other Exam 

Geography Chapter -2 Globe : latitudes and Longitudes

Ø  हमारी पृथ्वी गोल नहीं है| उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी तथा मध्य में थोड़ी उभरी हुई है |

Ø  ग्लोब : ग्लोब पृथ्वी का लघु रूप में एक वास्तविक प्रतिरूप है|



Ø  ग्लोब विभिन्न आकार एवं प्रकार के हो सकते है – बड़े ग्लोब ,जो आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान नहीं ले जाए सकते; पाकेट में रखने योग्य छोटे ग्लोब तथा गुब्बारे जैसे ग्लोब

Ø  अक्ष : एक सूई ग्लोब में झुकी हुई अवस्था स्थित होती है, जिसे अक्ष कहा जाता है|

Ø  ग्लोब पर दो बिंदु जिनसे होकर सुई गुजरती है , उत्तर तथा दक्षिण ध्रुव है|

Ø  ग्लोब को इस सूई के चारों ओर पृथ्वी की भाँति पश्चिम से पूर्व की ओर घुमाया जा सकता है |

Ø  विषुवत वृत : एक काल्पनिक रेखा ग्लोब को दो बराबर भागों में बांटती है , विषुवत वृत कहा जाता है |

Ø  पृथ्वी के उत्तर में स्थित आधे भाग को उत्तरी गोलार्ध तथा दक्षिण वाले आधे भाग को दक्षिणी गोलार्ध कहा जाता है |

Ø  विषुवत वृत पृथ्वी पर एक काल्पनिक वृत बनाती है और इसका उपयोग पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों की स्थिति ज्ञात करने में होता है |

Ø  अक्षांश : विषुवत वृत से ध्रुवों तक स्थित सभी समानंतर वृतों को अक्षांश रेखाएं कहा जाता है | अक्षांशों को अंश में मापा जाता है | विषुवत वृत सबसे बड़ी अक्षांश रेखा है | यह शून्य अक्षांश को दर्शाती है |

Ø  विषुवत वृत के उत्तर में 90 अंश के अक्षांशीय विस्तार को उत्तरी गोलार्द्व तथा विषुवत वृत के दक्षिण में 90 अंश के अक्षांशीय विस्तार को दक्षिणी गोलार्द्व कहते है |

Ø  अक्षांश रेखा की महत्वपूर्ण विशेषताएं :

Ø  ये पूर्व से पश्चिम दिशा में खींची जाती है |

Ø  इनका महत्व किसी स्थान की स्थिति जानने के लिए होती है |

Ø  विषुवत वृत से धुर्वों की ओर अक्षांश रेखा की लम्बाई कम हो जाती है |

Ø  किन्हीं दो अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी समान होती है जो लगभग 111 किलोमीटर की होती है |

Ø  अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या 180 है |

Ø  विषुवत वृत सबसे बड़ी अक्षांश रेखा है |

Ø  किन्ही दो अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी के क्षेत्र को कटिबंध (Zone) कहते है |

Ø  23.5 अंश उत्तरी अक्षांश रेखा को कर्क रेखा (Tropic of Cancer) , 66.5 अंश उत्तरी अक्षांश रेखा को उत्तर ध्रुव वृत (Arctic Circle ), 23.5 अंश दक्षिणी अक्षांश रेखा को मकर रेखा और 66.5 अंश दक्षिणी अक्षांश रेखा को दक्षिण ध्रुव वृत (Antarctic Circle ) कहा जाता है |

Ø    पृथ्वी के ताप कटिबंध

Ø  पृथ्वी को तीन ताप कटिबंध में विभाजित किया गया है | 1. उष्ण कटिबंध 2. शीतोष्ण कटिबंध 3. शीत कटिबंध

उष्ण कटिबंध- Torrid Zone 

Ø  उष्ण कटिबंध (उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र ) Torrid Zone:  1. यह क्षेत्र 23.5 अंश उत्तर ( कर्क रेखा ) से 23.5 अंश दक्षिण (मकर रेखा ) तक को कहा जाता है |

Ø  सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है और पूरे साल गर्म रहता है |

शीतोष्ण कटिबंध- Temperate Zone 

Ø  शीतोष्ण कटिबंध (Temperate Zone ):   यह क्षेत्र 23.5 अंश उत्तर अक्षांश से  66.5 अंश उत्तर अक्षांश एवं 23.5 अंश दक्षिण अक्षांश से  66.5 अंश दक्षिण अक्षांश तक को कहा कहा जाता है |

Ø  इस कटिबंध में सूर्य की किरने तिरछी पड़ती है |

शीत कटिबंध- Frigid Zone 

Ø  शीत कटिबन्ध 66.5 अंश उत्तरी अक्षांश से 90 उत्तरी अक्षांश तथा 66.5 अंश दक्षिणी अक्षांश से 90 दक्षिणी  अक्षांश तक के क्षेत्र को कहा जाता है |

Ø  इस कटिबन्ध में ठंढ बहुत होती है क्योंकि यहाँ सूर्य क्षितिज से ज्यादा ऊपर नहीं आ पाता है |



मेरिडियन एवं देशांतर

Ø  मेरिडियन : दिन का वह समय जब सूर्य अपनी सबसे ऊँची स्थिति में होता है (दोपहर 12 बजे ) जो उत्तरी गोलार्द्व को दक्षिणी गोलार्द्व से जोड़ते है और आधा वृत बनाते है वो मेरिडियन कहलाते है |

Ø  मेरिडियन विषुवत वृत को 90°  पर विभाजित करता है |

Ø  यह गोलार्द्व पर एक दूसरे से मिल जाते है |

Ø  प्रधान देशांतर रेखा : वो मेरिडियन जो की लन्दन की ग्रीनविच वेधशाला से गुजरती है |

Ø  इसे 0° माना जाता है |

Ø  यह पृथ्वी को दो हिस्सों में बांटती है – पूर्वी और पश्चमी

देशांतर :

Ø  एक काल्पनिक रेखा जो उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को मिलाती है , देशांतर कहलाती है |

Ø  यह काल्पनिक रेखा पृथ्वी को दो देशांतरिय भागों में विभाजित करती है – पूर्वी देशांतर और पश्चमी देशांतर |



Ø  पूर्वी देशांतर और पश्चमी देशांतर को विभाजित करने वाली रेखा को प्रमुख याम्योतर (Prime Meridian ) कहा जाता है | प्रमुख याम्योतर का मान 0° देशांतर है तथा यहाँ से 180° पूर्व या 180° पश्चिम तक गणना करते है |

Ø  प्रमुख याम्योतर  तथा 180°  याम्योत्तर मिलकर पृथ्वी को दो समान भागों पूर्वी गोलार्द्व और पश्चमी गोलार्द्व में विभक्त करता है |

जाली (Grid):

Ø  जाली :- जब दो रेखाएं मेरिडियन और समानांतर रेखाएं एक दुसरे को काटती है |

Ø  इससे हमें किसी भी स्थान को पहचानने में आसानी होती है |

Ø  जब हमें देशांतर और अक्षांश की सही-सही जानकारी दी जाए तो आसानी से उस स्थान पर पहुँच सकते है|



Ø  अक्षांश और देशांतर में अंतर : 

अक्षांश

देशांतर

* इससे सर्दी, गर्मी का पता चलता है |

* इससे समय का पता चलता है |

* ये उत्तरी-दक्षिणी  गोलार्द्व को दो भागों में विभाजित करती है |

* ये पूर्वी,पश्चमी गोलार्द्व को दो भागों में विभाजित करती है |

* ये समानतर दूरी वाली रेखाएं होती है

* ये आपस में मिल जाती है |

 

स्थानीय समय

Ø  समय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी,चन्द्रमा एवं ग्रहों की गति है |

Ø  सूर्योदय और सूर्यास्त विश्व में समय का निर्धारण का सबसे अच्छा साधन है |

Ø  स्थानीय समय का अनुमान सूर्य के द्वारा बन्ने वाली परछाई से लगाया जा सकता है , जो दोपहर में सबसे छोटी और सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सबसे लम्बी होती है |

Ø  ग्रीनविच पर स्थित प्रमुख याम्योत्तर पर सूर्य जिस समय आकाश के सबसे ऊँचे बिंदु पर होगा , उस समय याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों पर दोपहर होगी | यानी दोपहर 12 बजे  होंगें |

Ø  जब पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घुमती है तो पूर्व में ग्रीनविच से आगे समय होगा और जो देश पश्चिम में होता है वहां समय पीछे होता है , कारण यह है  कि पूर्व में  सूर्य की किरणें पहले पड़ती है |

Ø  AM- Anti Meridian (12 बजे से पहले )

Ø  PM- Post Meridian ( 12 बजे के बाद )

समय की गणना

Ø  पृथ्वी  24 घंटे में एक चक्कर पूरा करती है |

Ø  360° = 24 घंटे

Ø  360°/24 = 15° = 1 घंटे

Ø  15° = 60 मिनट

Ø  1° = 4 मिनट

Ø  स्थानीय समय देशांतर पर निर्भर करता है | भारत के संदर्भ में अवलोकन करते है | भारत में 82.30° पूर्व  को मानक याम्योत्तर माना जाता है | अत:  भारत का स्थानीय समय क्या होगा ?



Ø  1°= 4 मिनट , अत:  82.30° पूर्व * 4 मिनट = 330 मिनट

Ø  330/60 घंटे =  5 घंटे 30 मिनट

Ø   भारत का स्थानीय समय ग्रीनविच से  5 घंटे  30 मिनट आगे है | इसलिए जब लंदन में दोपहर  12 बजे होंगे , तब भारत में शाम के 5:30 बजे होंगे |

Also read: 

👉  इतिहास  कक्षा -6 अध्याय - 1 : क्या , कहां, कैसे और कब 

👉  इतिहास कक्षा -6 अध्याय - 2 : आरंभिक मानव की खोज 

👉 भूगोल  कक्षा - 6 अध्याय - 1 : सौरमंडल में पृथ्वी 

Friday, 19 November 2021

NCERT History Notes Class 6: Chapter 2-इतिहास कक्षा -6:अध्याय -2 आरंभिक मानव की खोज

Class -6 Chapter: 1 Earth in our Solar System इतिहास : हमारे अतीत -1 वर्ग 6 अध्याय – 1 : क्या , कब , कहां और कैसे ?

NCERT History Notes Class 6: Chapter 2-
इतिहास  कक्षा -6:अध्याय -2 आरंभिक मानव की खोज  


अध्याय -2 : आरंभिक मानव  की खोज में

आप क्या सीखेंगें :

*      आखेटक-खाद्य संग्राहक का जीवन

*      पाषाण युग

*      पर्यावरण युग

*      आग की खोज

आखेटक-खाद्य संग्राहक का जीवन

* आरंभिक मानव आखेटक- खाद्य संग्राहक था | अर्थात मतलब है कि वह भोजन उपार्जन के लिए

शिकार करना , कंद-मूल-फल-फूल, दाने, पौधे-पत्तियाँ इक्कठा करते थे |

* आखेटक खाद्य संग्राहक के लोग एक जगह से दूसरी जगह पर घूमते रहते थे अर्थात खानाबदोश की तरह रहते थे |

खानाबदोश जीवन के कारण 

* कुछ समय बीतने के बाद एक जगह पर भोजन के स्रोत समाप्त हो जाते होंगें | इसलिए लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते थे |

* जानवर भोजन की तलाश में अथवा अन्य जानवरों के शिकार के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान जाते थे | इसलिए इन जानवरों के शिकार करने वाले लोग इनके पीछे-पीछे जाया करते थे |

* पेड़ों और पौधों में फल-फूल अलग-अलग मौसम में आते है, इसीलिये लोग उनकी तलाश में उपयुक्त मौसम के अनुसार अन्य इलाकों में घूमते होंगे |

* कुछ नदियाँ,झील और तालाब गर्मियों में सूख जाते है , इसलिए लोगों को पानी की तलाश में नई जगह जाना पड़ता होगा |

आरंभिक मानव  के बारे में जाकारी कैसे मिलती है ?

* आरंभिक मानव शिकार करने , फल-फूल काटने, हड्डियां और मांस काटने और पेड़ों की छाल और जानवरों की खाल उतारने के लिए पत्थरों, लकड़ियों और हड्डियों के औजार बनाए| इनमें से पत्थरों के औजार आज भी बचे है|



रहने की जगह निर्धारित करना

* आरंभिक मानव का निवास स्थान गुफाएं एवं कंदराओं , नदियों और झीलों के किनारे मिले है | लोग गुफाओं में इसलिए रहते थे , क्योंकि यहाँ उन्हें बारिश, धुप और हवाओं से राहत मिलती थी | भीमबेटका (आधुनिक मध्य प्रदेश ) इसका उदाहरण है |

पुरास्थल :

* पुरास्थल उस स्थान को कहते है जहां औजार , बर्तन और इमारतों जैसी वस्तुओं के अवशेष मिलते है| ऐसी वस्तुओं का निर्माण लोगों ने अपने काम के लिए किया था और बाद में वे उन्हें वहीं छोड़ गए | ये जमीन के ऊपर, अन्दर , कभी-कभी समुद्र और नदी के तल में भी पाए जाते है |    

आग की खोज :

* मानव की पहली खोज आग जलाने सीखना माना जाता है | आग की खोज पाषाण काल में हुआ  था | इस खोज के कारण मानव शिकार को आग में पका कर खाने लगा, प्रकाश के उपयोग में लाया जाने लगा और खतरनाक जानवरों को दूर आदि भगाने में इस्तेमाल किया |

पाषाण काल  (Stone Age)

आरंभिक मानव शिकार करने एवं अन्य कार्य के लिए औजार बनाने के लिए पत्थरों का प्रयोग करते थे | इसलिए इस युग को पाषाण काल कहा गया | पाषाण काल को तीन कालों में विभाजित किया गया है |

* पुरापाषाण काल

* मध्य पाषाण काल

* नव पाषाण काल

 पुरापाषाण काल

*  इतिहासकारों ने पुरापाषाण काल का समय 20 लाख से 12 हजार वर्ष पहले तक माना गया है | इस युग के औजार बेढंगे हुआ करते थे |

*  पुरापाषाण काल को तीन भागों में विभाजित किया गया है | आरंभिक पुरापाषाण काल, मध्य पुरापाषाण काल और उत्तर पुरापाषाण काल |मानव इतिहास की 99 प्रतिशत घटनाएं इसी काल में घटित हुई |

मध्य पाषाण काल

* इस काल में पर्यावरणीय बदलाव मिलते है |

* इसका समय लगभग 12,000  साल पहले से लेकर 10,000 साल पहले तक माना जाता है |

* इस काल में पाषाण औजार आमतौर पर छोटे होते थे | इन्ह्ने ‘ माइक्रोलिथ ‘ यानि लघु पाषाण कहा जाता है |

* इस काल में भोजन संग्रहण की शुरुआत मानी जाती है |