Friday, 26 February 2021

आप भारतीय इतिहास की सबसे साहसी महिला किसे मानते है और क्यों?

आप भारतीय इतिहास की सबसे साहसी महिला किसे मानते है और क्यों? 

नीरजा! जिस पर भारत ही नहीं पाकिस्तान, US को भी गर्व है

नीरजा 22 साल की एक लड़की थी. ये उम्र होती है जब समझदारी सिर पर सवार होने की कोशिश कर रही होती है. और इंसान का दिमाग बचपन जवानी के बीच रस्साकसी में झूलता है. इस उम्र में नीरजा ने अपनी जान दी, दूसरों की जान बचाने के लिए. इस तरह से जान तो फौजी गंवाते हैं. पर नीरजा न तो फौजी थी, न ही कोई सोशल वर्कर. फिर क्या थी?

7 सितंबर, 1963 को चंडीगढ़ में जन्मी. मां रमा भनोट और पिता हरीश भनोट की लाडली थी. प्यार से वो उसे लाडो बुलाते. पिता पत्रकार थे. 21 साल की उम्र में शादी हो गई. पति ने दहेज की डिमांड रख दी. परेशान नीरजा दो महीने बाद मम्मी-पापा के पास वापस आ गई. इसके बाद पैन ऍम में फ्लाइट अटेंडेंट की नौकरी के लिये अप्लाई किया. चुने जाने के बाद मायामी गई. ट्रेनिंग के दौरान नीरजा को एंटी-हाइजैकिंग कोर्स में एड्मिशन लेना हुआ. मां नहीं चाहती थी कि नीरजा दाखिला लें. उन्होंने नीरजा को नौकरी छोड़ने को कहा. दुनिया में हम एक ही आदमी को अपने हिसाब से समझा सकते हैं. वो हैं मम्मी. तो नीरजा ने भी समझा दिया. कहा सब अगर ऐसा ही करेंगे तो देश के फ्यूचर का क्या होगा. पैन एम में जुड़ने से पहले नीरजा ने मॉडलिंग की थी. वीको, बिनाका टूथपेस्ट, गोदरेज डिटर्जेंट और वैपरेक्स जैसे प्रो़डक्ट्स के ऐड किए.

5 सितंबर, 1986 को एक प्लेन हाइजैक हुआ. पैन एम फ्लाइट 73 मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही थीं. प्लेन में 361 यात्री और 19 क्रू मेंबर थे. कराची एयरपोर्ट पर चार अबू निदाल ग्रुप के चार टेररिस्ट्स ने उसे हाइजैक कर सबको बना लिया होस्टेज. प्लेन में नीरजा सीनियर फ्लाइट अटेंडेंट थी. नीरजा ने जब ये बात पायलट को बताई. तीनों पायलट कॉकपिट से सुरक्षित निकल लिए. उनके जाने के बाद प्लेन और यात्रियों की जिम्मेदारी नीरजा पर थी. आतंकवादियों ने नीरजा को सभी के पासपोर्ट इकठ्टा करने बोला. पता लगाने के लिए कि इनमें से कौन कौन अमेरिकी है. नीरजा ने पासपोर्ट तो इकठ्टा किए. चालाकी से अमेरिकी नागरिकों के पासपोर्ट छिपा दिए. 17 घंटे के बाद अतंकवादियों ने यात्रियों को मारना शुरू कर दिया. प्लेन में बम फिट कर दिया.

नीरजा ने हिम्मत दिखाई. प्लेन का इमरजेंसी डोर खोल दिया. यात्रियों की मदद की जिससे वो सुरक्षित बाहर निकल सकें. तीन बच्चो को निकालने के दौरान आतंकवादियों ने बच्चो को टारगेट कर गोली चलानी चाही. नीरजा की वजह से वो बच गए. वो जाकर भिड़ गई आतंकवादियों से. हाथापाई हुई और एक टेरोरिस्ट ने नीरजा पर गोलियों की बौछार कर दी. उसने इमरजेंसी डोर से खुद को सुरक्षित नहीं निकाला. बाकी पैसेंजर्स को बचाने में जान गवां दी.

नीरजा ने जान देकर देश-दुनिया की दुवाएं हासिल कींय. अवॉर्ड पाए. भारत सरकार बहादुरी के सबसे बड़े अवॉर्ड अशोक चक्र से सम्मानित किया. पाकिस्तान सरकार ने उन्हें तमगा-ए-इंसानियत से नवाज़ा. अमेरिकी सरकार ने नीरजा को 2005 में जस्टिस फॉर क्राइम अवॉर्ड से सम्मानित किया. 2004 में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया था.

दुनिया नीरजा को ‘हीरोइन ऑफ हाईजैक’ के नाम से जानती है. उनकी याद में मुंबई के घाटकोपर इलाके में एक चौराहे का नाम रखा गया है, जिसका उद्घाटन किया था अमिताभ बच्चन ने. एक संस्था भी है जिसका नाम है नीरजा भनोट पैन ऍम न्यास. ये ऑर्गनाइजेशन महिलाओं को हिम्मत और बहादुरी के लिए अवॉर्ड देती है. हर साल दो अवॉर्ड दिए जाते हैं. एक हवाई जहाज पर रहने वालों को इंटरनेशनल लेवल पर. दूसरा इंडिया में महिलाओं को बहादुरी के लिए. नाइंसाफी और अत्याचार के खिलाफ लड़ने के लिए.



स्रोत:quora.com

Monday, 22 February 2021

Bharat Scout & Guide registration

 Bharat Scout & Guide 

भारत स्काउट और गाइड

भारत स्काउट्स एंड गाइड्स (बीएस एंड जी) भारत का नेशनल स्काउटिंग एंड गाइडिंग संघ  है। एसोसिएशन सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत एक सोसायटी है और एक गैर-आधिकारिक संगठन है | भारत में स्काउट की स्थापना  1909 में हुई थी, जबकि भारत में गाइडिंग की शुरुआत 1911 में हुई थी। स्काउटिंग एंड गाइडिंग लड़कों और लड़कियों के लाभ के लिए डिज़ाइन की गई अच्छी नागरिकता के लिए एक स्वीकृत प्रकार का चरित्र प्रशिक्षण और तैयारी है, जो जिम्मेदारी और भरोसेमंद प्रेम की भावना का प्रतीक है। पहल और नेतृत्व के विकास के लिए व्यक्तिगत अवसर हों और आत्म-नियंत्रण, आत्म-निर्भरता और आत्म-दिशा को बढ़ावा दें।

Scouts and Guides Motto

Be Prepared

स्काउट्स एंड गाइड्स  नियम 

एक स्काउट / गाइड भरोसेमंद है
एक स्काउट / गाइड वफादार है
एक स्काउट / गाइड सभी के लिए एक दोस्त है और हर दूसरे स्काउट / गाइड के लिए एक भाई / बहन है।
एक स्काउट / गाइड विनम्र है
एक स्काउट / गाइड जानवरों का दोस्त है और प्रकृति से प्यार करता है।
एक स्काउट / गाइड अनुशासित है और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करने में मदद करता है।
एक स्काउट / गाइड साहसी होता है।
एक स्काउट / गाइड मितव्ययी है।
एक स्काउट / गाइड विचार, शब्द और कर्म में शुद्ध है।
 
Ajith Sir Online Coaching


जवाहर नवोदय विद्यालय प. सिंहभूम में भी 2014 से Scout & Guide विभाग कार्य कर रही है | नवोदय विद्यालय के छात्रों में चरित्र-निर्माण में अपना अभूतपूर्व योगदान दे रहा है | 
जवाहर नवोदय विद्यालय प. सिंहभूम के वर्ग  छठीं और सातवीं के अध्ययनरत छात्र-छात्रा स्काउट और गाइड में भाग ले सकते है | इसके लिए आपको नीचे दिए फ़ार्म को भरना है | 


Friday, 19 February 2021

Monday, 15 February 2021

jnvst class 9 practice paper and syllabus

Jawahar Navodaya Vidyalaya Entry Test class 9 lateral Practice Paper & Syllabus


Students and Parents  those who searching practice paper and syllabus  class 9 entry test lateral 2021 unsolved and solved paper can download . Read carefully and visit link to get practice paper.

EXAMINATION
 Date of Examination – 24/02/2021 (Wednesday)

 Duration – 2 ½ hours (10:00 AM to 12:30 PM).

 However, in respect of candidates with special needs (Divyang), additional time of 30 minutes will be provided, subject to the production of certificates from the competent authority. 

 Centre for examination shall be the JAWAHAR NAVODAYA VIDYALAYA of the district concerned/ any other centre allotted by NVS. 

 Medium of Language for Examination will be English/Hindi. 

 Students have to answer in OMR sheet


COMPOSITION OF THE TEST

 Selection Test will consist of questions from the subjects of Mathematics, General Science, English and Hindi. Difficulty level of the test paper shall be of Class VIII. 

Nature of the Selection Test
 
Subject 

Marks

01.    English-         15 

02.     Hindi-           15 

03.     Maths-          35 

04.     Science-       35 

TOTAL 100 Marks 

The test will be of objective type with 2 ½ hours duration without any break.

Model Paper and Practice Paper Link










Jawahar Navodaya Vidyalaya Entry Test class 9 lateral Practice Paper & Syllabus

महाराजा रणजीत सिंह और एक मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी

महाराजा रणजीत सिंह और एक मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी- इतिहास के पन्नों से 

                                            source-BBC



उनकी उम्र केवल अठारह वर्ष की थी और वह एक पेशेवर नर्तकी और गायिका थीं. लेकिन एक ही मुलाक़ात में, उनकी सुंदरता और आवाज़ के जादू ने महाराजा को उनका दीवाना बना दिया था. यहाँ तक कि वो उस लड़की से शादी करने के लिए कोड़े खाने के लिए भी तैयार हो गए.

उनकी उम्र केवल अठारह वर्ष की थी और वह एक पेशेवर नर्तकी और गायिका थीं. लेकिन एक ही मुलाक़ात में, उनकी सुंदरता और आवाज़ के जादू ने महाराजा को उनका दीवाना बना दिया था. यहाँ तक कि वो उस लड़की से शादी करने के लिए कोड़े खाने के लिए भी तैयार हो गए.

यह लड़की अमृतसर की गुल बहार थीं. पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह ने उन्हें पहली बार एक शाही समारोह में गाते हुए सुना और देखा. उसी समय, महाराजा ने गुल बहार के क़रीब जाने की कोशिश की. वह उन्हें अपनी प्रेमिका बना कर रखना चाहते थे. लेकिन गुल बहार ने ऐसा करने से मना कर दिया.

पंजाब के इतिहास पर नज़र रखने वाले एक शोधकर्ता और लेखक इक़बाल क़ैसर के अनुसार, रणजीत सिंह उन पर इतने मोहित हो गए थे, कि वे अपना सब कुछ देने के लिए तैयार थे. "गुल बहार एक मुस्लिम परिवार से थीं, इसलिए उन्होंने महाराजा रंजीत सिंह से कहा, कि वह प्रेमिका बन कर नहीं रह सकतीं."

उस समय महाराजा की आयु 50 वर्ष से अधिक थी और यह वह दौर था, जब अंग्रेज़ों ने उपमहाद्वीप में पैर जमाने शुरू कर दिए थे. गुल बहार ने प्रस्ताव रखा कि अगर महाराजा चाहें तो वह उनसे शादी करने को तैयार हैं.

इक़बाल क़ैसर का कहना है कि "महाराजा रणजीत सिंह इतने जज़्बाती हुए, कि उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया."

पंजाब के महाराजा ने औपचारिक तौर पर गुल बहार के परिवार से उनका हाथ माँगा.

एक कथन के अनुसार, गुल बहार ने अपने विवाह प्रस्ताव के साथ यह शर्त रखी, कि रणजीत सिंह उनके घर वालों से रिश्ता मांगने के लिए, ख़ुद पैदल चल कर, लाहौर से अमृतसर आएंगे. हालाँकि, इक़बाल क़ैसर के अनुसार, प्रामाणिक इतिहास की पुस्तकें इसकी पुष्टि नहीं करती हैं.

हालांकि, पंजाब के महाराजा के लिए भी सिख धर्म के बाहर एक मुस्लिम लड़की से शादी करना इतना आसान नहीं था.



अकाल तख़्त ने रंजीत को कोड़ों की सज़ा सुनाई

सिख धर्म के धार्मिक लोगों ने रणजीत सिंह के इस फ़ैसले पर नाराज़गी जताई. महाराजा को अमृतसर के सिख तीर्थस्थल अकाल तख़्त में बुलाया गया. अकाल तख़्त को सिख धर्म में धरती पर खालसा का सबसे ऊँचा स्थान माना जाता है.

कुछ ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, अकाल तख़्त ने रणजीत सिंह को गुल बहार से शादी करने की सजा के रूप में अपने हाथों से पूरे गुरुद्वारे के फ़र्श को धोने और साफ करने की सज़ा दी.

हालांकि, इक़बाल क़ैसर का कहना है, कि उनके शोध के अनुसार, ऐसा नहीं था. "अकाल तख़्त ने रणजीत सिंह को कोड़े मारने की सज़ा दी. रणजीत सिंह ने अपनी इस रानी के लिए इस सज़ा को भी स्वीकार कर लिया."





क्या वाक़ई रणजीत सिंह को कोड़े मारे गए थे?

रणजीत सिंह की उम्र उस समय 50 वर्ष से अधिक थी. लेकिन समस्या यह थी कि वह महाराजा थे, जिनके साम्राज्य की सीमा पंजाब से भी बाहर तक फैली हुई थी. ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति को कौन कोड़े मार सकता था? दूसरी ओर, अकाल तख़्त का आदेश भी था, जिसे रणजीत सिंह के लिए भी अस्वीकार करना मुमकिन नहीं था.

इक़बाल क़ैसर के अनुसार, "इसका समाधान यह निकला गया, कि एक रेशम का कोड़ा तैयार किया गया. और इसके साथ रणजीत सिंह को कोड़े मारे गए और सज़ा पूरी की गई थी." उनका कहना है कि इस तरह से महाराजा ने "कोड़े भी खा लिए और और गुल बहार को भी नहीं छोड़ा."

रणजीत सिंह और गुल बहार की इस शादी और उस पर होने वाले जश्न का वर्णन, कई इतिहासकारों ने विस्तार से किया है. वह लिखते हैं, कि जिन बड़े बुजुर्गों ने लाहौर और अमृतसर में इस शादी को देखा था, वो बाद में भी याद करते थे, कि यहाँ कभी ऐसी शादी भी हुई थी.




'रणजीत सिंह ने मेंहदी भी लगाई'

शोधकर्ता इक़बाल क़ैसर का कहना है, कि इस शादी का वर्णन, इतिहासकार सुजान राय ने अपनी पुस्तक 'इतिहास का सारांश' में लिखा है. वह लिखते हैं कि "महाराजा रणजीत सिंह ने औपचारिक तौर पर मेहंदी लगवाई, ख़ुद को सोने के गहनों से सुसज्जित किया, अपनी शाही पोशाक पहनी और हाथी पर सवार हुए."

अमृतसर के राम बाग़ में एक बंगला था, जहां यह शादी समारोह होना था. इस बंगले को कई दिनों पहले बंद कर दिया गया था और कई दिनों तक इसकी सजावट का काम किया गया था. इसे खाली करा दिया गया था और इसके बाद, जो पहला इंसान इसमें दाखिल हुआ, वह गुल बहार थी.

शादी समारोह से एक रात पहले, एक संगीत कार्यक्रम आयोजित किया गया था, मुजरे हुए और चराग़ां किया गया. उस कार्यक्रम में गाने वालों को पुरस्कार के रूप में सात हज़ार रुपये दिए गए. उस समय यह बहुत बड़ी धनराशि थी."

'गुल बहार के गुज़रने के लिए रावी नदी के नाले पर पुल बनाया गया'

शादी समारोह बड़ी धूमधाम से हुआ था. जिसके बाद शाही जोड़ा अमृतसर से लाहौर के लिए रवाना हुआ. लेकिन लाहौर में प्रवेश करने से पहले, रावी नदी का एक छोटा सा नाला उनके रास्ते में रुकावट बन गया.

अगर कोई और होता, तो वह उसे पैदल पार कर सकता था, लेकिन गुल बहार अब लाहौर की रानी थी. ये कैसे हो सकता था, कि रानी पालकी से उतर कर पैदल नाला पार करती? गुल बहार ने ऐसा करने से मना कर दिया.

इक़बाल क़ैसर के अनुसार, "कुछ लोग कहते हैं, कि इस नाले के ऊपर एक पुल बनाया गया था, जिस पर चल कर रानी ने नाले को पार किया था."

बाद में यह पुल 'पुल कंजरी' के नाम से मशहूर हुआ. इक़बाल क़ैसर के अनुसार, इसका हिस्सा आज भी मौजूद है और यह पुल 1971 में पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध के दौरान काफी चर्चा में था.

हालांकि, कुछ कथनों के अनुसार, यह पुल वह स्थान है, जहाँ रणजीत सिंह अपनी अमृतसर यात्रा के दौरान रुकते थे. इसके लिए बनाई गई इमारतें आज भी यहाँ मौजूद हैं.

इस कथन के अनुसार, इस पुल का नाम 'पुल कंजरी' रंजीत सिंह की प्रेमिका मोरा सरकार से जोड़ा जाता है, जिसने पैदल नाला पार करने पर नाराज़गी जताई थी.

क्या गुल बेगम ने अपने मक़बरे का निर्माण ख़ुद कराया?

गुल बेगम से शादी के आठ साल बाद रंजीत सिंह की मृत्यु हो गई. इसके कुछ ही समय बाद, अंग्रेज़ों ने पंजाब पर पूरा नियंत्रण कर लिया.

रंजीत सिंह की अंतिम पत्नी ज़िन्दां को देश निकला दिया गया क्योंकि उनके बेटे दिलीप सिंह को ही रंजीत का उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया था. बहार बेगम की ख़ुद की कोई संतान नहीं थी. इसलिए उनसे ब्रिटिश सरकार को कोई ख़तरा नहीं था.

महाराजा की पत्नी होने के नाते, गुल बेगम के लिए मासिक वजीफा निर्धारित कर दिया गया था, जो प्रति माह लगभग बारह सौ रुपये था.

गुल बेगम ने एक मुस्लिम लड़के, सरदार ख़ान को गोद ले रखा था. सन 1851 में, गुल बेगम ने अपने लिए लाहौर के प्राचीन मियानी साहब क़ब्रिस्तान के बराबर में एक बाग़ का निर्माण कराया था. इक़बाल क़ैसर के अनुसार, इस बाग़ में उन्होंने अपना मक़बरा भी बनवाया था.

इसकी दीवारों पर की गई नक्काशी तो मिट चुकी है, लेकिन मकबरे के अंदर की छत और दीवारों पर बनी ख़ूबसूरत नक्काशी आज भी ऐसे ही मौजूद है, जैसा कि उन्हें कल ही बनाया हों.

इस बगीचे के निर्माण के लगभग दस साल बाद गुल बेगम की भी मृत्यु हो गई और उन्हें इसी मक़बरे में दफ़नाया गया.

इक़बाल क़ैसर कहते हैं, "इस मक़बरे के अंदर के भित्तिचित्र बहुत मूल्यवान हैं. पहले से ही मुग़लिया दौर चला आ रहा था. फिर सिख इसमें शामिल हुए और यह सभी इस मक़बरे में अपनी बुलंदी के रूप में मौजूद हैं."

बाग़ गुल बेगम आज भी उसी जगह पर मौजूद हैं, लेकिन इसकी हालत बहुत खस्ता हाल है. इक़बाल क़ैसर के अनुसार, "यह उजड़ा दियार, एक ऐसी महिला की क़ब्र है, जो कभी लाहौर की रानी थी."

इक़बाल क़ैसर का कहना है, कि गुल बेगम के पास इतनी बड़ी संपत्ति और जागीर थी, कि उन्होंने इसे संभालने के लिए अपना एक कोष बनाया हुआ था और वो ख़ुद इसका प्रबंध संभालती थी. उनकी मृत्यु के बाद, यह संपत्ति उनके पालक पुत्र सरदार ख़ान को दे दी गई.

सरदार ख़ान का परिवार आज भी उस जगह के आसपास रहता है जहां यह बाग़ है. बाग़ गुल बेगम भी उनकी ही संपत्ति है और इस क्षेत्र को मोहल्ला गुल बेगम कहा जाता है. बगीचे के बीच में ही एक परिसर में सरदार ख़ान की क़ब्र भी मौजूद है.





Source:BBC

Sunday, 14 February 2021

Jaliyanwala Bagh Massacre

 Jaliyanwala Bagh Massacre--1919

जलियावाला बाग हत्याकांड-1919

1. यह घटना 13 अप्रैल 1919 ई0 में पंजाब के अमृतसर के जलियावाला बाग नामक स्थान में हुआ था ।
2. रालेट ऐक्ट का विरोध पूरे देश में चल रहा था।महत्वपूर्ण नेताओं की गिरफ्तारी हो रही थी ।
3. पंजाब में दो लोकप्रिय नेता डॉ सत्यपाल और डॉ सैफ़ुद्दीन किचलू को गिरफ्तार कर जिला बदर कर दिया गया ।
4. सजे विरोध में जनता ने शांतिपूर्ण जुलूस निकाला जिसे आगे बढ़ने पर पुलिस ने गोलियां चलाई ।
5. शहर में विद्रोह को कुचलने के लिए सैन्य ब्रिग्रेडियार जनरल ओ. डायर को नियुक्त किया  और मार्शल ला लागू कर दिया गया ।
6. 13 अप्रैल 1919 को वैशाखी के दिन अमृतसर में लगभग साम 4 बजे जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 20000 लोग एकत्रित हुए ।
7. इस बाग में एक ही 6 फिट चौड़ी संकरी गली थी जो बाग को जाती थी ।
8. जनरल डायर अपने सिपाहियों के साथ आया और  दस मिनट के अंदर 1650 रांउड गोलियां बरसाई।
9. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 379 लोग मारे गई और सैकड़ों घायल हुए । परन्तु वास्तविकता में  कुछ और थी ।
प्रतिक्रिया
1.इस हत्याकांड की घटना सबको अचंभित कर दिया ।
2. सरकार विवशता में लार्ड हंटर की अध्यक्षता में एक समिति नियुक्त की जिसमे 5 अंग्रेज और 3 भारतीय सदस्य थे ।
3. रवीन्द्रनाथ टैगोर ने "सर" की उपाधि लौटा दी ।
4. महात्मा गांधी ने कैसर के हिन्द की उपाधि लौटा दी ।
5. इस घटना ने अंग्रेजों के सहयोगी गांधी को असहयोगी बना दिया ।
Ajith Sir Online Coaching

vijaynagar empire

Vijaynagar Empire (विजयनगर साम्राज्य )
एक साम्राज्य की राजधानी:विजयनगर 
(लगभग 14वीं  से 16वीं सदी तक)

link

Saturday, 13 February 2021

PROFIT AND LOSS

 PROFIT AND LOSS (लाभ और हानि )


Link:

1. Navodaya Vidyalaya  class 9 admit card 2021 download link 

2. jnv class 9 practice paper

3. Navodaya  vidyalaya practice paper -40

4. Navodaya Vidyalaya class 9 lateral model paper

महत्वपूर्ण तथ्य 

1. क्रय मूल्य : किसी वस्तु को जिस मूल्य पर खरीदा जाता है , वह मूल्य , क्रय मूल्य कहलाता है |

2. विक्रय मूल्य : किसी वस्तु को जिस मूल्य पर बेचा जाता है, वह मूल्य विक्रय मूल्य कहलाता है |

3. लाभ: अगर विक्रय मूल्य , क्रय मूल्य से अधिक हो, तो उन दोनों के बीच  का अंतर लाभ कहलाता है |

4. हानि : अगर विक्रय मूल्य , क्रय मूल्य से कम हो, तो उन दोनों के बीच का अंतर हानि कहलाता है |


महत्पूर्ण सूत्र

लाभ=  विक्रय मूल्य  - क्रय मूल्य 

हानि = क्रय मूल्य  - विक्रय मूल्य 

क्रय मूल्य = विक्रय मूल्य - लाभ 

क्रय मूल्य = विक्रय मूल्य + हानि 

लाभ % = (लाभ *100/क्रय मूल्य) %

हानि % = (हानि *100/क्रय मूल्य )%



 

Friday, 12 February 2021

विदेशी यात्रियों का आगमन

 

विदेशी यात्रियों का आगमन

यात्री का नाम-   देश-   समय-    शासक/भ्रमण क्षेत्र-   विशेष

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*मेगस्थनीज-यूनानी-305-297ई.पू.-चन्द्रगुप्त मौर्य-राजदूत

*डाईमेक्स-सीरिया-298-273ई.पू.-बिन्दुसार-राजदूत

*डायोनिसियस-मिस्र-284-262ई.पू.-बिन्दुसार-राजदूत

*स्ट्रैबो-यूनान-100ई.पू.-मौर्यकालीन भारत- .............

*प्लिनी-यूनान-78-77ई.पू.-पश्चिमोत्तर भारत-यात्री

*फाह्यान-चीन-399-414ई.-चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य-बौद्व यात्री

*ह्वेनसांग-चीन-629-644ई.-हर्षवर्धन-बौद्व यात्री

*इतिसँग-चीन-675-695ई.-पश्चिमोत्तर भारत- बौद्व यात्री

*सुलेमान-अरब-9 वीं सदी-देवपाल -यात्री

*अलमसूदी-अरब-915-916ई.- महीपाल प्रथम- लेखक

*अलबरूनी-गजनी-1000-1030ई.-पश्चिमोत्तर भारत-लेखक

मार्कोपोलो-इटली-1288-1292ई.-पांड्य राज्य-यात्री

*इब्नबतूता-मोरक्को-1333-1342ई.-मुहम्मद तुगलक-यात्री

*निकोलो कॉन्टी-इटली-1420-1422ई.-देवराय प्रथम-यात्री

*अब्दुर्रज्जाक-ईरान-1442-1443ई.-देवराय द्वितीय-राजदूत

*निकितन-रूस-1466-72ई.-मुहम्मदशाह तृतीय-व्यापारी

*एड्वर्ड बारबोसा-पुर्तगाल-1516-18ई.-कृष्णदेव राय -यात्री

*डेमिगोस पेईज-पुर्तगाल-1520-22ई.-कृष्णदेव राय-यात्री

*नूनीज-पुर्तगाल-1535-1537ई.-अच्युतदेव राय-पादरी

*राल्फ फिच-ब्रिटेन-1583-1591ई.-अकबर-यात्री

*सीजर फ्रेडरिक-पुर्तगाल-16वीं सदी-विजयनगर-यात्री

*हाकिन्स-ब्रिटेन-1608-1613ई.-जहांगीर-व्यापारी

*विलियम फिंच-अंग्रेज-1608-1612ई.-जहांगीर-व्यापारी

*सर टोमस रो-अंग्रेज-1615-1619ई.-जहांगीर-राजदूत

*पीटर मुंडी-इटली-1630-1634ई.-शाहजहां-यात्री

*ट्रेवनीयर-फ्रांस-1641-1687ई.-शाहजहां-जौहरी

*मनूची-इटली-1656-1687ई.-औरंगजेब-.................

*बर्नीयर-फ्रांस-1658-1668ई.-औरंगजेब-चिकित्सक

*लामा तारानाथ-तिब्बत-16वीं सदी-पूर्वी भारत- बौद्व गुरु

*जी एस लीविदेव-रूस-1785-1797ई.-बंगाल-संगीतकार