Wednesday, 8 April 2020

मौर्य वंश-322 BC-185 BC( भाग-1)

मौर्य साम्राज्य का स्रोत:-
साहित्यिक स्रोत :-
    पुस्तक   -   लेखक
* अर्थशास्त्र  - चाणक्य
* मुद्राराक्षस- विशाखदत्त
* कल्पसूत्र - भद्रबाहु
*  परिशिष्टपर्वन- हेमचन्द्र
*  कथासरित्सागर- सोमदेव
*  वृहत्कथामन्जरी- क्षेमेन्द्र
*  इंडिका - मेगास्थनीज
* इसके अतिरिक्त विष्णु पुराण , दीपवंश , महावंश, महाबोधि वंश , दिव्यादान , अशोकावदान, मंजूश्रीमूलकल्प , ग्रँथों में मौर्य वंश की जानकारी मिलती है ।
पुरातात्विक स्रोत :-
अशोक शिलालेख , रूद्रदामन का जूनागढ़(गिरनार) अभिलेख, आहत सिक्के आदि मौर्य साम्राज्य की जानकारी उपलब्ध कराते है ।
मौर्य वंश की उतपत्ति:-
चाणक्य के अर्थशास्त्र में भी चन्द्रगुप्त मौर्य को क्षत्रिय  प्रमाणित करता है ।
* बौद्व ग्रँथों महावंश , महापरिनिर्वाणनसुत्त , दिव्यादान  में चन्द्रगुप्त मौर्य को क्षत्रिय कहा है ।
* जैन ग्रँथों  परिशिष्टपर्वन , पुन्याश्रव कथाकोश में भी  चन्द्रगुप्त मौर्य को क्षत्रिय कहा है ।
* मुद्राराक्षस , कथासरित्सागर और वृहत्कथामन्जरी में चन्द्रगुप्त मौर्य को शुद्र कहा है ।
चन्द्रगुप्त मौर्य :-
* मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य ने 322 ई0 पू0 किया ।
* चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ई0 पू0 में हुआ था
चन्द्रगुप्त मौर्य के मगध सम्राट बनाने में आचार्य चाणक्य की बड़ी भूमिका थी । जिन्हें अपना प्रधानमंत्री बनाया ।
एरियन और प्लूटार्क  ने चन्द्रगुप्त मौर्य  को          " एंड्रोकोट्स"  के नाम का प्रयोग किया है ।
* सर्वप्रथम सर विलियम जोन्स ने चन्द्रगुप्त मौर्य के लिए "सैंडरोकोट्स " तथा "एंड्रोकोट्स" नामों का तादात्म्य स्थापित किया था ।
जस्टिन ने चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना को " डाकुओं का  गिरोह " कहा है ।
चन्द्रगुप्त मौर्य 305 ई0 पू0 सिकन्दर के सेनापति सेल्युकस निकेटर को पराजित किया  । सेल्युकस ने अपनी पुत्री  कार्नेलिया का विवाह चन्द्रगुप्त  से किया तथा  चार प्रांत  काबुल (पेरोपनिसडाई) , कंधार ( आरकोसिया) , हेरात ( एरिया) और मकरान( जेड्रोसिया) सौपें । यह विवाह भारतीय इतिहास का प्रथम अंतरराष्ट्रीय विवाह था ।
चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैन गुरु भद्रबाहु से जैन धर्म की शिक्षा ली।
मेगास्थनीज  सेल्युकस निकेटर का राजदूत था जो चन्द्रगुप्त मौर्य के दरबार में था और इंडिका नामक ग्रन्थ लिखा ।
* चन्द्रगुप्त मौर्य और सेल्युकस निकेटर के बीच का हुए युद्व का वर्णन  ऐप्पियस ने किया है।
*  चन्द्रगुप्त मौर्य की मृत्यु 298 ई0पू0 श्रवनवेलगोला में उपवास( सल्लेखना)  द्वारा हुई ।
* रूद्रदामन अभिलेख से ज्ञात होता है कि सौराष्ट्र में पुष्यगुप्त चन्द्रगुप्त मौर्य का राज्यपाल था ।
* जूनागढ़ स्थित सुदर्शन  झील का निर्माण चन्द्रगुप्त मौर्य ने कराया था ।
*  चन्द्रगुप्त मौर्य की राजधानी " पाटलीपुत्रा " थी ।
प्लूटार्क ने लिखा है कि " चन्द्रगुप्त मौर्य ने 6लाख की सेना लेकर सम्पूर्ण भारत को रौंदा डाला और उस पर अपना अधिकार कर लिया ।"



बिंदुसार: ( 298-273ई0 पू0 )
*  चन्द्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी बिंदुसार हुआ, जो 298 ई0 पू0 मगध के सिंहासन पर बैठा ।
* यूनानी लेखकों ने बिंदुसार को अमित्रोकेडीज कहा है जिसका संस्कृत  रूपांतर अमित्रघात (शत्रुओं का नाश करनेवाला )  होता है ।
*  जैन परम्पराओं के अनुसार बिंदुसार के माता का नाम  दुर्घरा था ।
महावंश टीका में बिंदुसार की पत्नी का नाम वम्पा और अशोकावदान में सुभद्रांगी दिया है ।
*  वायुपुराण में बिंदुसार का नाम भद्रासर  तथा अन्य पुराणों में वारिसार मिलता है ।
स्ट्रेबो के अनुसार सीरिया का राजा एण्टियोकस ने डायमेकस को अपना राजदूत बनाकर बिंदुसार के दरबार में भेजा था ।
प्लिनी का कहना है कि मिस्र का राजा फिलाडेलफस (टॉलमी-II) ने पाटलीपुत्रा में डियानीसियस नाम का राजदूत भेजा था ।
एथिनीयस नामक यूनानी लेखक के अनुसार सीरिया के राजा से तीन वस्तुओं की मांग की थी । 
1. मीठी मदिरा
2. सूखी अंजीर
3. एक दार्शनिक(सोफिस्ट)
*  बिंदुसार के दरबार में 500 सदस्यों वाली एक मंत्रिपरिषद थी जिसका प्रधान खल्लाटक था ।
* जैन धर्म के अनुसार बिंदुसार को सिंहसेन कहा है ।
दिव्यादान में तक्षशिला में होने वाले विद्रोह का वर्णन करता है जिसको दबाने के लिए बिंदुसार ने अशोक को भेजा था ।
*  दिव्यादान के अनुसार बिंदुसार ने अवन्ति का उपराजा अशोक को नियुक्त किया था ।

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