Wednesday, 10 February 2021

खारवेल कौन था ?

 खारवेल कौन था ?

  कलिंग का चेदी राजवंश 

* " चेदी " भारत की अत्यंत प्राचीन जाती थी | 

*  छठी शताब्दी ई० पू० में चेदी महाजनपद विद्यमान था जिसमें  सम्भवत: आधुनिक बुन्देलखण्ड तथा उसके समीपवर्ती प्रदेश शामिल थे |

चेदी महाजनपद की राजधानी शक्तिमती ( चेतीय जातक के अनुसार सोत्थिवती ) थी |

* लगता है इसी चेदी वंश की एक शाखा कलिंग गयी और एक स्वतंत्र राजवंश की स्थापना की |

कलिंग के चेदी राजवंश का संस्थापक महामेघवाहन था |

चेदी राजवंश का सर्वाधिक शक्तिशाली राजा खारवेल हुआ |

हाथिगुम्फा अभिलेख से खारवेल के बारे में जानकारी मिलती है |

खारवेल :
हाथिगुम्फा अभिलेख से पता चलता है की  खारवेल  इस राजवंश का तीसरा शासक था |

15 वर्ष की आयु में युवराज बना और 24 वर्ष की आयु में राजा |

* उसका विवाह ललक हथ्थी सिंह नामक एक राजा की कन्या  से हुआ था |

उपलब्धियां:

* राज्याभिषेक के प्रथम वर्ष कलिंग नगर का निर्माण कराया | इन कार्यों पर 5 लाख मुद्राएं खर्च की |

* दूसरे वर्ष खारवेल ने अपनी सेना पश्चिम की और भेजी जिसका सामना  सातवाहन नरेश शातकर्णी प्रथम की सेना से हुई थी |यह एक झडप थी |

* तीसरे वर्ष खारवेल ने अपनी राजधानी में संगीत , वाद्य , नृत्य , नाटक आदि का उत्सव मनाया |

* चौथे वर्ष बरार के भोजकों तथा पूर्वी खानदेश और अहमदनगर के राथिकों के विरोद्व सैनिक अभियान किये |

* पाचवे वर्ष तन्सुली से एक नहर के जल को अपनी राजधानी लाया |

* छठे वर्ष एक लाख मुद्रा खर्च कर प्रजा को सुखी रखने के लिए प्रयास किये |

* 7वें वर्ष की जानकारी संदिग्ध है |

8वें वर्ष खारवेल ने उत्तर भारत की और सैनिक अभियान किये और गोरथागिरी ( बराबर जी पहाड़ियां ) को पार किया | 

* नवें वर्ष उत्तर भारत की विजय के उपलक्ष्य में प्राची नगर के दोनों ओर" महाविजय प्रासाद " बनवाये |

* 10वे वर्ष पुन: उत्तर भारत पर आक्रमण किया परन्तु अपेक्षित सफलता नही मिली |

* 11 वें वर्ष में खारवेल दक्षिण भारत की ओर सैनिक अभियान किये और पांड्य राज्य तक जा पहुंचा |

* 12 वें वर्ष उत्तर और दक्षिण भारत दोनों ओर सैनिक अभियान किया |

मगध नरेश  ( बहसतिमित्र ) पराजित हुआ और अधीनता स्वीकार किया |

दक्षिण भारत में पांड्य राज्य पर आक्रमण किया और अधीनता स्वीकार कर लिया |

13वें वर्ष खारवेल ने कुमारीपहाडी ( उदयगिरी -खांडागिरी ) पर जैन भिक्षुओं के निवास के निमित गुहाविहारों का निर्माण करवाया |

खारवेल जैन धर्म का अनुयायी था और उसने 13 वर्ष तक शासन किया |

*  इतिहासकारों ने  खारवेल का समय 49-37 ई० पू० निर्धारित किया है |

*  हाथीगुम्फा अभिलेख एक प्रशस्ति के रूप में है  जो उड़ीसा प्रांत के पुरी जिले में उदयगिरी -खंडगिरी  पहाड़ी पर जैन भिक्षुओं के लिए बनवाई गयी थी | 

हाथीगुम्फा अभिलेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा में उत्कीर्ण है |

* इस लेख की खोज विशप स्टालिंग ने की थी | 1885 में भगवान लाल इंद्र ने इसका शुद्व वाचन किया और  राजा खारवेल सही ढंग से पढ़ा गया | 

खारवेल कौन था ?

No comments:

Post a Comment

M. PRASAD
Contact No. 7004813669
VISIT: https://www.historyonline.co.in
मैं इस ब्लॉग का संस्थापक और एक पेशेवर ब्लॉगर हूं। यहाँ पर मैं नियमित रूप से अपने पाठकों के लिए उपयोगी और मददगार जानकारी शेयर करती हूं। Please Subscribe & Share

Also Read

Ncert history class 12 MCQ

1.  2. 3. 4. 5. Bhakti Sufi Traditions Mcq Pdf 6. Vijayanagara Empire mcq pdf 7. Through the eyes of Travellers Mcq.pdf 8. Rebels and The R...