Friday, 22 May 2020

भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -6

युद्वोत्तर बन्दोबस्त और ब्रेटन - वुड्स संस्थान :
* दो  विश्व युद्वों के बीच आर्थिक अनुभवों से  सिख लेकर विश्व के  अर्थशास्त्रियों एवं राजनेताओं ने दो उपायों के निष्कर्ष पर पहुँचा |
1. वृहत उत्पादन , व्यापक उपभोग  , स्थिर आय एवं रोजगार कायम रखने के लिए सरकारी हस्तक्षेप एवं नियन्त्रण आवश्यक है |
2. आर्थिक स्थिरता एवं अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक सम्बन्धों को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक था कि सरकार वस्तुओं , पूंजी और श्रम के प्रवाह को नियंत्रित करे |
               उपर्युक्त मसलों पर विचार-विमर्श के लिए  अमेरका के न्यू हैम्पशायर के ब्रेटन बुड्स नामक स्थान पर जूलाई 1944 को एक सम्मेलन आयोजन किया गया | इस  सम्मेलन में दो अंतर्राष्ट्रीय संस्थान का गठन का निर्णय लिया गया |
1. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF- International Money  Fund)-  सदस्य देशों के विदेश व्यापार में लाभ और घाटे से निपटने के लिए  IMF की स्थापना |
2. अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक ( The International Bank for Reconstruction and Development)(world Bank) - इस संस्था का उद्वेश्य युद्वोत्तर पुनर्निर्माण के लिए पैसे का इंतजाम करना |
* विश्व बैंक एवं आई . एम. एफ को  "ब्रेटन बुड्स संस्थान की जुड़वाँ बहन"  भी कहा जाता है |  इस आर्थिक व्यवस्था को ब्रेटन बुड्स व्यवस्था भी कहा जाता है |
*यह संस्था  1947 से काम करना शुरू किया | अमेरिका विश्व बैंक और  आई . एम. एफ के किसी भी फैसले को वीटो कर सकता है |
* वीटो (निषेधाधिकार ): इस अधिकार के सहारे एक ही  सदस्य की असहमति किसी भी प्रस्ताव को खारिज करने का आधार बन जाती है |

अनौपनिवेशीकरण और स्वतन्त्रता :
* दूसरा विश्व युद्व के बाद एशिया और अफ्रीका के ज्यादातर उपनिवेश स्वतंत्र , स्वाधीन राष्ट्र बन चुके थे , परन्तु सभी देश अतिशोषण के कारण गरीबी और संसाधनों के कमी से जूझ रहे थे |
* अविकसित और  विकासशील देश विश्व बैंक और आई. एम.एफ. से ही कर्ज लेने को मजबूर थे जिसपर भूतपूर्व औपनिवेशिक शक्तियों का ही वर्चस्व था |
* विकासशील देश  औद्योगिक देशों के  बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के शोषण से बचने  एवं अपने संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण हेतु एक नयी अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली ( New International Economic Order - NIEO)  और       ग्रुप -77 (1964 में स्थापित ) के रूप में संगठित हुए |
*  ग्रुप -77 का उद्वेश्य :
-  अपने देश के संसाधनों पर सही मायने में नियंत्रण
-  विकास के आर्थिक सहायता
- कच्चे माल के लिए सही कीमत
-  तैयार मालों के लिए विकसित देशों के बाजारों में पहुँच

भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -1
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -2
भूमंडलीकृत विश्व का बनना (class-10, chapter-4) भाग 3
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -4
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -6
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -5
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -7
भूमण्डलीकृत विश्व का बनना (Class-10, chapter-4) भाग -8



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