Friday, 15 May 2020

यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय ( class-10, Chapter-1, part-3)

यूरोप में राष्ट्रवाद का निर्माण
* 18वीं सदी के दौरान जर्मनी , इटली , स्विट्जरलैंड कई छोटे छोटे निरंकुश राजतन्त्रों के अधीन थे |
* इन  राज्यों में अलग -अलग भाषा -भाषी , विभिन्न  जातीय समूहों  और पहचान वाले लोग थे |
*  आस्ट्रिया -हंगरी पर शासन करनेवाला  हैब्सबर्ग साम्राज्य कई  अलग-अलग.  क्षेत्रों और जनसमूहों को जोड़ कर बना था |

*  इस साम्राज्य में कुलीन वर्ग जर्मन भाषा बोलते थे , लाम्बाडी और वेनेशिया में इत्तालावी भाषा और हंगरी में मैग्यार भाषा का प्रयोग होता था , शेष अन्य भाषा का प्रयोग करते थे |
*  इन समूहों को आपस में बाँधने वाला तत्व सम्राट के प्रति निष्ठा थी | इनसे राजनीतिक एकता को आसानी से बढ़ावा नही मिल सकता था |
राष्ट्रवाद के विकास में सहायक तत्व :
* 18वी सदी  में  यूरोप में कुलीन वर्ग सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली समूह था | ग्रामीण इलाकों में जायदाद और शहरों में हवेलियों के मालिक थे | जमीन के अधिकाँश भाग इनके नियन्त्रण में थे |
*  जनसंख्या के अधिकांश लोग कृषक थे परन्तु कृषि जमीन पर अधिकार नगण्य था |
* 18-19 वीं सदी में औद्योगिक उत्पादन से व्यापार वाणिज्य का विकास होने से एक नया मध्यम  वर्ग तैयार हुआ |
*  मध्यमवर्ग  में उद्योगपति , पूंजीपति , व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और अन्य व्यवसायी वर्ग शामिल थे  | शिक्षित होने के कारण इस वर्ग में राष्ट्रवादी भावना का विकास  अधिक हुआ |

उदारवादी राष्ट्रवाद :
*  उदारवाद शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के मूल शब्द liber पर आधारित है जिसका अर्थ है " आजाद "|
* नए मध्यमवर्ग  के लिए उदारवाद का मतलब था  "व्यक्ति के लिए आजादी " और क़ानून के समक्ष सबकी बराबरी |
* फ्रांसीसी क्रान्ति के बाद उदारवाद निरंकुश शासक और पादरीवर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति , संविधान  तथा संसदीय प्रतिनिधि सरकार के पक्षधर थे |
* निजी सम्म्पति की सुरक्षा के अधिकार की भी मांग करते थे |
* सैद्वान्तिक रूप से उदारवादियों ने समानता पर बल दिया परन्तु व्यवहार में लागू नही किया गया | व्यस्क मताधिकार के लिए 19वीं -20वीं सदी में महिलाओं सहित वयस्कों को आन्दोलन करना पडा था |
* आर्थिक क्षेत्र में , उदारवादी , बाजारों की मुक्ति और चीजों और पूंजी के आवागमन पर राज्य द्वारा लगाए गए नियंत्रणों को खत्म करने के पक्ष में थे |
*   वाणिज्यिकवर्ग  एक ऐसे एकीकृत क्षेत्र की मांग कर रहा था जहां अबाध गति से व्यापारिक गतिविधियाँ चलाई जा सके |
* 1834  में प्रशा की पहल पर एक शुल्क संघ " जाल्वेराइन " स्थापित किया गया जिसमें अधिकाँश जर्मन राज्य शामिल हो गए |
* इस  संघ ने  शुल्क अवरोधों को समाप्त कर दिया और मुद्राओं की संख्या दो कर दी | आर्थिक हित ने राष्ट्रीय एकीकरण का सहायक बनाया |
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