Sunday, 12 September 2021

झारखंड विधानसभा में स्थानीय लोगों के लिए 75% कोटा विधेयक पारित

झारखंड विधानसभा में स्थानीय लोगों के लिए 75% कोटा विधेयक पारित


संदर्भ:

हाल ही में, ‘झारखंड विधानसभा द्वारा ‘झारखंड राज्य स्थानीय उम्मीदवारों का नियोजन विधेयक, 2021’ (‘The Jharkhand State Employment of Local Candidates Bill, 2021’) पारित कर दिया गया है।

  • इस विधेयक में, स्थानीय लोगों को निजी क्षेत्र की नौकरियों में 40,000 रुपये तक के मासिक वेतन सहित 75% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
  • अधिनियम अधिसूचित होने के बाद, झारखंड ऐसा कानून पारित करने वाला आंध्र प्रदेश और हरियाणा के बाद तीसरा राज्य बन जाएगा।

विधेयक में निजी क्षेत्र की नौकरियों की परिभाषा:

विधेयक में, दुकानों, प्रतिष्ठानों, खदानों, उद्यमों, उद्योगों, कंपनियों, सोसाइटीज, ट्रस्टों, ‘सीमित देयता भागीदारी फर्मों’ और ‘दस या अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने वाले किसी भी व्यक्ति’ को निजी क्षेत्र की इकाई के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके अलावा, इस संदर्भ में सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित किया जा सकता है।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  1. प्रत्येक नियोक्ता के लिए, इस विधेयक (अधिनियम में परिवर्तित होने के बाद) के लागू होने के तीन महीने के भीतर, एक निर्दिष्ट पोर्टल पर सकल मासिक वेतन के रूप में 40,000 रुपये – या सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित नियमों के अनुसार- से कम वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को पंजीकृत करना अनिवार्य होगा।
  2. निर्दिष्ट पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को नियुक्त या नियोजित नहीं किया जाना चाहिए।
  3. कोई भी स्थानीय उम्मीदवार निर्धारित पोर्टल में अपना पंजीकरण किये बिना 75 प्रतिशत आरक्षण का लाभ प्राप्त करने का पात्र नहीं होगा।
  4. वांछित कौशल योग्यता या प्रवीणता के पर्याप्त स्थानीय उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने पर, नियोक्ता इस नियम से छूट का दावा कर सकते हैं।
  5. नियोक्ताओं को पोर्टल पर रिक्तियों और रोजगार के बारे में एक त्रैमासिक विवरणी प्रस्तुत करनी होगी जिसकी जांच एक ‘अधिकृत अधिकारी’ (Authorised Officer – AO) द्वारा की जाएगी। ‘जिला रोजगार अधिकारी’ ‘अधिकृत अधिकारी’ (AO) के रूप में कार्य करेगा और वह सत्यापन के उद्देश्य से किसी भी रिकॉर्ड मी मांग कर सकता है।
  6. असुन्त्ष्ट नियोक्ता एओ या डीओ द्वारा पारित आदेश के 60 दिनों के भीतर एक अपीलीय प्राधिकारी – निदेशक, रोजगार और प्रशिक्षण, झारखंड सरकार- के समक्ष अपील दायर कर सकते है।

इस नीति से संबंधित चिंताएँ एवं अन्य मुद्दे:

  1. यह नीति अनुच्छेद 16 से सबंधित संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
  2. विविधता में एकता पर प्रभाव: इस नीति से किसी क्षेत्र में स्थानीय बनाम गैर-स्थानीय द्वन्द की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे देश के एकीकरण को खतरा पैदा हो सकता है।
  3. यह क्षेत्र में पूंजी निवेश को हतोत्साहित कर सकता है।
  4. एक व्यवसाय की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।
  5. प्रतिस्पर्धा की भावना के खिलाफ है।
Source:The Hindu

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A.KUMAR
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