Saturday, 4 April 2020

गौतम बुद्ध: बौद्व धर्म एवं दर्शन( भाग -2)

बौद्व धर्म के सिद्वान्त और दर्शन
बौद्व धर्म के चार आर्य सत्य:-
1. दुःख ( संसार दुःख से व्याप्त है ।
2. दुःख समुदाय (दुःख का कारण)     
3.  दुःख निरोध ( तृष्ना के विनाश से दुःख का निरोध)    4. दुःख निरोधगामिनी प्रतिपदा ( तृष्ना का परित्याग)
बौद्ध धर्म के आष्टांगिक मार्ग :
1. सम्यक दृष्टि  (चार आर्य सत्यों का सही परख)                 
2.सम्यक संकल्प(भौतिक वस्तु एवं दुर्भावना का त्याग)
3. सम्यक वाणी (धर्मसम्मत एवं मृदु वाणी का प्रयोग)
4. सम्यक कर्म ( सत्य कर्म करना )
5. सम्यक आजीव ( सदाचारी जीवन जीते हुए आजीविका कमाना )
6. सम्यक व्यायाम ( विवेकपूर्ण प्रयत्न एवं शुद्व विचार ग्रहण करना )
7. सम्यक स्मृति ( कर्म, वचन , मन के प्रति सचेत रहना
8. सम्यक समाधि ( चित की समुचित एकाग्रता )
दस शील तथा आचरण
1. अहिंसा 2. सत्य 3. अस्तेय( चोरी न करना )
4. अपरिग्रह ( धन संग्रह न करना ) 5. ब्रह्मचर्य
6. नृत्य व संगीत का त्याग  7. सुगन्धित पदार्थों का त्याग  8. असमय भजन का त्याग  9. कोमल शय्या का त्याग  10. कामिनी कंचन का त्याग
*  अनीश्वरवाद- जैन धर्म की ही तरह बौद्ध धर्म में भी ईश्वर की सत्ता में विश्वास नही था ।
*  बौद्व धर्म में कर्म फल के सिद्वान्त को तर्क संगत माना है ।
*  बुद्व आत्मा की परिकल्पना को स्वीकार नही करते ।
*  बुद्व का पुनर्जन्म में विश्वास हैं।
*  संघ में प्रविष्ट होने को  " उपसम्पदा " कहा जाता है ,       बौद्व संघ का संगठन गणतंत्र प्रणाली पर आधारित थी ।
*  बौद्ध धर्म  माह के चार दिवस (अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी) उपवास के होते , इसे " उपोस्थ" कहा जाता है ।
*  बौद्वओं का सबसे पवित्र पर्व  "वैशाख पूर्णिमा" है , जिसे बुद्व पूर्णिमा कहा जाता है ।
*  महात्मा बुद्व से सम्बद्व आठ स्थान ( लुम्बिनी, गया, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, सनकास्य, राजगृह, वैशाली ) "अस्टमहास्थान" के रूप में चर्चित है ।
*  "बोरोबुदुर का बौद्व स्तूप" विश्व का सबसे विशाल स्तूप है जिसका निर्माण शैलेन्द्र राजाओं ने इंडोनेशिया के जावा में कराया ।
*  बुद्व का पंचशील सिद्वान्त का वर्णन " छान्दोग्य उपनिषद" में मिलता है ।
*  शंकराचार्य को " प्रच्छन्न बौद्व " भी कहा जाता है ।
*  बुद्व के " अष्टांगिक मार्ग" का स्रोत " तैत्तरीय उपनिषद " है ।
*  "सुत्तपिटक " को बौद्व धर्म का एनसाइक्लोपीडिया" कहा जाता है ।
* महात्मा बुद्ध के तीन नाम - बुद्व, तथागत, शाक्यमुनि
* बुद्व के जन्म की जातक कथाएं " सुत्तपिटक" में वर्णित है ।
* त्रिपिटक तीन है ।
सुत्तपिटक - बौद्व धर्म का सिद्वान्त वर्णित
विनयपिटक- बौद्व धर्म के आचार विचार एवं नियम
अभिधम्मपिटक- बौद्व दर्शन का वर्णन
*  बौद्व धर्म से सम्बंधित स्मारक - सांची, भरहुत , अमरावती के स्तूप , कार्ले की बौद्व गुफाएं,अजन्ता की गुफा, बाघ की गुफाएं, बराबर की गुफाएं ।
*  98 ई0 में कनिष्क के शासनकाल में कुण्डलवन बौद्व संगीति में बौद्व धर्म का विभाजन दो भाग " महायान" और " हीनयान" में हो गया ।
* हीनयान सम्प्रदाय के सभी ग्रन्थ "पाली भाषा "में है ।
* हीनयान अनुयायी बिना किसी परिवर्तन के बुद्व के मूल उपदशों को स्वीकार करते है , इन्हें निम्नमार्गी एवं रूढ़िवादी की संज्ञा दी जाती है ।
* हीनयान सम्प्रदाय दो भागों में विभक्त हो गया - "वैभाषिक" और "सौत्रान्तिक" ।
* " वैभाषिक" "सम्यक ज्ञान " को वास्तविक प्रमाण मानते है ,इसकी उतपति काश्मीर में हुई और मुख आचार्य - वसुमित्र, बुद्वदेव , धर्मत्रात, आदि थे ।
"सौत्रान्तिक मत" का मुख्य आधार सुत्तपिटक है ।
* महायान का अर्थ है - उत्कृष्ट मार्ग
* महायान बुद्व को भगवान के रूप मानते थे एवं मूर्ति पूजा करते है तथा इस सम्प्रदाय की स्थापना " नागार्जुन" को माना जाता है ।
* महायान  सम्प्रदाय भी दो भागों में विभक्त हुआ - "शून्यवाद(माध्यमिक )" (प्रवर्त्तक- नागार्जुन) और "विज्ञानवाद(योगाचार)"(प्रवर्त्तक- मैत्रेय) 
* भारत का आइंस्टीन " नागार्जुन" को कहा जाता है जिनकी पुस्तक " माध्यमिक कारिका" सापेक्षवाद सिद्वान्त  को वर्णन  करती है ।
* वज्रयान सम्प्रदाय की स्थापना सातवीं सदी में हुआ । जिसमें "तन्त्र-मन्त्र "विद्या का प्रभाव था ।
कुछ प्रमुख बौद्व मन्दिर 








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