Sunday, 24 February 2019

इतिहास : वर्ग-12 पाठ-1(भाग-2)

          हड़प्पा संस्कृति की सर्वप्रमुख विषेशता इसका नगर  निर्माण योजना है । हड़प्पा  एवं मोहनजोदड़ो की खुदाई में पूर्व एवम पश्चिम में दो टीले मिलते है । पूर्वी टिले पर नगर तथा पश्चिमी टीले पर दुर्ग स्थित है । दुर्ग में सम्भवतः शासक वर्ग के लोग रहते थे। दुर्ग में परिखा ,प्रकार ,द्वार, राजमार्ग, प्रासाद ,सभा ,एवं जलाशय आदि वस्तु के सभी तत्व मिलते है। प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर निचले स्तर पर ईंटों के मकानों वाला नगर बसा था। जहां सामान्य लोग रहते थे। नगरो के दुर्ग ऊँची और चौड़ी प्राचीरों में बुर्ज तथा मुख्य दिशाओं में द्वार बनाये गए थे। इनका निर्माण एक सुनियोजित योजना के आधार पर किया गया था ।


1.  सड़क व्यवस्था:  मोहनजोदड़ो की एक प्रमुख विशेषता उसकी सड़कें थी।यहां की मुख्य सड़क 9.15 मीटर चौड़ी थी जिसे पुरातत्वविदों ने राजपथ कहा है ।अन्य सड़कों की लंबाई 2.75m से 3.66m तक थीं । जाल पद्वति के आधार पर नगर नियोजन होने के कारण सड़कें एक दुसरे के समकोण पर काटती थी जिनसे नगर कई खंडों में विभक्त हो गया था।इस पद्वति को आक्सफोर्ड सर्कस का नाम दिया गया हैं।सड़कें मिट्टी क़ी बनीं थी।एवँ इनकी सफाई की समुचित व्यवस्था थी। कुड़ा-करकट इकट्ठा करने के लिए गड्डे बनाये जाते या कूड़ेदान रखे जाते थे।

2.  जल निकास प्रणाली::   हड़प्पा सभ्यता की नगर योजना क़ी एक औऱ विषेशता जल निकास प्रणाली है।यहाँ के अधिकांश भवनों मे निजी कुँए एवं स्नानागार होते थे।भवनो के कमरे, रसोई, स्नानागार, शौचालय आदि सभी का पानी भवन की छोटी छोटी नालियों से निकल कर गली की नाली मे आता था। गली की नाली को मुख्य सडक के दोनो ओर बनी नालियों से जोड़ा गया था। मुख्य सडक के दोनों ओर बनी पक्की नालियों को पत्थरों अथवा शिलाओं द्वारा ढक दिया जाता था । नालियों की सफाई एवम कूड़ा करकट को निकालने के लिए बीच बीच में नर मोखे (main hole) भी बनाये जाते थे।

3.  स्नानागार:  मोहनजोदड़ो का प्रमुख सार्वजनिक स्थल हैं यहाँ के विशाल दुर्ग में स्थित विशाल स्नानागार। यह 39 फुट लम्बा*23फुट चौडा*8फुट गहरा है। इसमें उतरने के लिए उत्तर एवं दक्षिण की ओर सीढ़ीयां बनी है । स्नानागार का फर्श पक्की ईटो से बनी है। सम्भवतः इस विशाल स्नानागार का उपयोग अनुष्ठानिक स्नान हेतु होता होगा । मार्शल महोदय ने इसी कारण इसे तत्कालीन विश्व का आश्चर्यजनक निर्माण कहा है ।
                   स्रोत: गूगल नेट

4.  अन्नागार:  मोहनजोदड़ो में ही 45 .72 लम्बाई मीटर *
चौड़ाई  22.86 मीटर एक अन्नागार मिला है । हड़प्पा के दूर्ग में भी 12 धन्य कोठार खोजे गए है । ये दो कतारों में 6-6 की संख्या में है । प्रत्येक का आकार  15.23 मीटर × 6.09 मीटर है । अन्नागार का सुदृढ व्यवस्था एक उच्चकोटि की थी ।


5.ईंट :  हड़प्पा संस्कृति के नगरो मे प्रयुक्त ईटे एक विशेषता थी। इस काल की ईंट चतुर्भजाकार थी। मोहनजोदड़ो से प्राप्त सबसे बड़ी ईंट का आकार 51.43cm*26.27cm*6.35 cm है। परन्तु सामान्य ईंटो का प्रयोग 27.94cm * 13.97cm * 6.35cm आकार वाली है ।

 *  गृह स्थापत्य : मोहनजोदड़ो का निचला हिस्सा आवासीय भवनों के उदाहरण प्रस्तुत करता है । इनमे से कई एक आंगन पर केंद्रित थे , जिसके चारों ओर कमरे बने थे । संभवत: आंगन खाना पकाने और  कताई करने जैसी गतिविधियों का केंद्र था । खास तौर से गर्म और शुष्क मौसम के लिए ।भूमि तल पर बनी दीवारों में खिड़कियां नही थी । हर घर ईंटो के फर्श से बना अपना एक स्नानाघर होता था जिसकी नालियाँ दीवारों के माध्यम से सडक़ की नालियों से जुड़ी हुई थी । कुछ घरों में दूसरे तल/छत पर जाने के लिए सीढ़ियों के अवशेष मिले है । कई आवासों में ऐसे कुँए होते थे जिससे बाहर  का व्यक्ति भी प्रयोग कर सकता था। मोहनजोदड़ो में ऐसे कुओं की संख्या अनुमानतः 700 बताई गई है ।


    हम कह सकते है कि हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषता नगर नियोजन प्रणाली है जो अन्य समकालीन सभ्यता में नही दिखती है।

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