Wednesday, 12 February 2020

इतिहास: धार्मिक साहित्य -ब्राह्मण साहित्य-1

इतिहास: धार्मिक साहित्य -ब्राह्मण साहित्य-1

भारतीय इतिहास के साहित्यिक स्रोतों को दो वर्गो में विभाजित किया जा सकता है ।
1. धार्मिक साहित्य
2. लौकिक साहित्य

     धार्मिक साहित्य को तीन वर्गों में विभाजित कर सकते है ।
1. ब्राह्मण साहित्य
2. बौद्ध साहित्य
3. जैन साहित्य

                                ब्राह्मण साहित्य
*  ब्राहमण साहित्य में सर्वाधिक प्राचीन ऋग्वेद है । ऋग्वेद के  द्वारा प्राचीन आर्यों के धार्मिक, सामाजिक,  आर्थिक  और राजनीतिक जीवन का परिचय मिलता है।
*   वेदो की संख्या 4 है ।- ऋग्वेद , यजुर्वेद , सामवेद , अथर्ववेद

*   चारों वेदों  का सम्मिलित रूप  संहिता कहलाता है ।
*   ऋग्वेद के दो ब्राह्मण ग्रन्थ है - ऐतरेय ब्राह्मण और कौषीतकि ब्राह्मण ।
*   यर्जुवेद के दो भाग है - शुक्ल यर्जुवेद और कृष्ण यर्जुवेद
यर्जुवेद के दो ब्राह्मण ग्रन्थ है - शतपथ ब्राह्मण, तैत्तिरीय ब्राह्मण
सामवेद के दो ब्राह्मण ग्रन्थ है - जैमिनीय ब्राह्मण , ताण्ड्य ब्राह्मण
अथर्ववेद के ब्राह्मण ग्रन्थ है - गोपथ ब्राह्मण ।
यज्ञ के विषयों को प्रतिपादन करने वाले ग्रन्थ "ब्राह्मण" कहलाते है ।
उपनिषद वेदों के अंतिम भाग है , इसे वेदांत भी कहा जाता है । उपनिषद भारतीय दर्शन के प्रमुख स्रोत है ।

उपनिषदों की कुल संख्या 108 है ।
आरण्यक -ऋषियों द्वारा वनों में कही जाने वाली रचनाओं को आरण्यक कहते है ।
आरण्यकों की संख्या 7 है ।
                                                                         क्रमशः............

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