Monday, 24 February 2020

पाषाण काल: नवपाषाण काल का इतिहास

पाषाण काल: नवपाषाण काल का इतिहास 

*  नवपाषाण काल में मानव भोजन संग्राहक से भोजन उत्पादक बन गया ।
*   विश्व स्तर पर नवपाषाण काल 9000 ई0 पूर्व मानी जाती है ,  जबकि भारत में इस काल की शुरुआत 7000 ईसा पूर्व मानी गई है  ।
*  नवपाषाण काल के प्रमुख स्थल हैं -  मेहरगढ़ ( सिंध- पाकिस्तान) ,  बुर्जहोम- कश्मीर , कीलीगुल मोहम्मद -    क्वेटा घाटी (पाकिस्तान) , राणा घुनडई- बलूचिस्तान ,  सराय खोला -रावलपिंडी , चिरांद- बिहार  , मास्की-  कर्नाटक ,  कोलडीहवा- उत्तर प्रदेश  । ब्रह्मगिरि, हल्लूर,कॉडकल, सनगनकल्लु - कर्नाटक , पैयमपल्ली- तामिलनाडु, पिकलीहल,उतनर(आंध्रप्रदेश) ।
*  प्रमुख उपकरण: कुल्हाड़ी, हंसिया, ओखली, हड्डी और सिंग से बनी छूरी,बरमा, रुखानी, आदि ।
*  नव पाषाण काल में मानव मृतकों को दफनाते समय उनकी आवश्यकता की वस्तुएं रख देते थे ।
*  दक्षिण भारत में कुछ कब्रगाहों में मृतकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए बड़े -बड़े पत्थर लगा दिए जाते थे जो महापाषाण (Megaliths) कहलाते है ।
*  मेहरगढ़-पाकिस्तान से कृषि एवं पशुपालन के प्रमाण मिले है ।
*  बुर्जहोम-काश्मीर में पालतू कुते भीमालिकों के शवों के साथ उनकी कब्रों में दफना दिए जाते थे ।
*  कोलडीहवा- उत्तरप्रदेश में चावल के खेती का प्रमाण मिले है ।
*  चिरांद-बिहार से चावल , गेहूं , मूंग, मसूर की खेती के प्रमाण मिले है ।साथ ही मिट्टी के बर्तन ,खिलौने , हड्डी के औजार  तथा मूर्तीयों के प्रमाण मिले है ।


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